यदि आप और मुंबई के डार्क इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह एक शानदार डॉक्यूमेंट्री है। यह आपको सोचने पर मजबूर कर देती है कि न्याय और अपराध के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है।
फिल्म में 90 के दशक के असली समाचार फुटेज और क्राइम सीन की तस्वीरों का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बहुत प्रामाणिक (authentic) बनाता है।
यह डॉक्यूमेंट्री दिखाती है कि कैसे पुलिस ने कानून को अपने हाथ में लिया। यह सवाल उठाती है कि क्या ये एनकाउंटर शहर की सुरक्षा के लिए जरूरी थे या ये पुलिस की अपनी सत्ता का खेल था।